भाषा विभाग पंजाब ने करवाया गया कहानीकार ‘प्रेम प्रकाश स्मृति समागम’

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जालंधर, 25 जून

भाषा विभाग, पंजाब के मार्गदर्शन में जिला भाषा कार्यालय, जालंधर द्वारा लायलपुर खालसा कॉलेज जालंधर के सैमिनार हॉल में कहानीकार ‘प्रेम प्रकाश स्मृति समागम’ आयोजित किया गया। इस दौरान उनकी कहानी कला और व्यक्तित्व पर विचार-चर्चा की गई।

समागम के दौरान डा. गुरइकबाल सिंह ने मुख्य वक्ता के रूप में चर्चा की शुरुआत की। डा. लखविंदर जौहल, भगवंत रसूलपुरी और अजमेर सिद्धू ने विचार-चर्चा को आगे बढ़ाया, जबकि विशेष अतिथि प्रो. गोपाल सिंह बुट्टर ने चर्चा को चरमोत्कर्ष पर पहुंचाया।

भाषा विभाग के निदेशक श्री जसवंत सिंह जफर ने स्वागत भाषण में कहा कि जालंधर पंजाबी कहानी का गढ़ रहा है। यहां कई नामवर कहानीकार हुए हैं और इन्हीं में शामिल प्रमुख कहानीकार प्रेम प्रकाश जी को जालंधर आकर याद करना उचित समझा गया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भाषा विभाग द्वारा जालंधर के अन्य साहित्यकारों को भी इसी तरह याद किया जाएगा।

श्री जफर ने कहा कि प्रेम प्रकाश विशेष कौशल और हौसले वाले कहानीकार थे। उन्होंने लीक से हटकर ऐसी कहानियां रचीं, जो केवल प्रेम प्रकाश ही लिख सकते थे।

जिला भाषा अधिकारी जालंधर डा. अजीतपाल सिंह जटाणा ने आए हुए अतिथियों को फूलों के गुलदस्ते भेंट किए।

समागम के मुख्य वक्ता डा. गुरइकबाल सिंह ने बताया कि प्रेम प्रकाश ने अपनी कहानियों के माध्यम से सामाजिक सच्चाई को बयान किया। वह शहरी मध्य वर्ग से संबंधित थे और उनकी कहानियों के पात्र भी इसी वर्ग से जुड़े थे। उन्होंने प्रेम प्रकाश की कुछ कहानियों से उदाहरण देकर चर्चा शुरू की।

कहानीकार भगवंत रसूलपुरी ने प्रेम प्रकाश से जुड़ी अपनी यादों का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी पीढ़ी के कई कहानीकारों को प्रेम प्रकाश ने अच्छा साहित्य पढ़ने और लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने उभरते लेखकों को संपादन और अनुवाद भी सिखाया। उन्होंने कहा कि प्रेम प्रकाश समकालीन लेखकों को बहुत पढ़ते थे और लेखकों को चिट्ठियों के जरिए अपनी टिप्पणियां भी भेजते थे, जो उनका बहुत बड़ा गुण था।

अजमेर सिद्धू ने कहा कि प्रेम प्रकाश ने हमें कहानियां लिखने की नई-नई तकनीकें बताईं। उन्होंने नए कहानीकारों को कहानी कला के गुर सिखाने से कभी गुरेज नहीं किया। वह अपनी रचनाओं और आम बातचीत के माध्यम से साफगोई से बात करने के लिए जाने जाते थे।

डा. लखविंदर जौहल ने अपने भावपूर्ण भाषण में बताया कि प्रेम प्रकाश एक बहुपरती इंसान और रचनाकार थे। जब भी उनसे मिलते तो एक नई परत देखने को मिलती थी। वे जो भी कार्य करते, उसकी प्रमाणिकता भी बनाए रखते थे। डा. जौहल ने कहा कि वे पंजाबी साहित्य संवाद के हंसमुख चेहरा थे। उनकी कहानियों ने रिश्तों की जटिलताओं को समझा और बयान किया।

विशेष अतिथि डा. गोपाल सिंह बुट्टर ने कहा कि प्रेम प्रकाश पंजाबी साहित्य के सुंदर व्यक्तियों में शामिल थे। भाषा विभाग पंजाब द्वारा किसी बड़े साहित्यकार को उसके शहर में आकर याद करना बहुत सराहनीय कार्य है।

समागम की सहयोगी संस्था लायलपुर खालसा कॉलेज के पंजाबी विभाग के प्रमुख डा. हरजिंदर सिंह सेखों ने कहा कि सभी वक्ताओं को सुनकर ऐसा लग रहा था जैसे प्रेम प्रकाश जी के जीवन की फिल्म आंखों के सामने चल रही हो।

अंत में कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. रशपाल सिंह संधू ने सभी का धन्यवाद किया। भाषा विभाग की ओर से विद्वानों को विभागीय शाल और पुस्तकों से सम्मानित किया गया।

मंच संचालन की भूमिका प्रो. संदीप सिंह ने बखूबी निभाई।

इस अवसर पर प्रो. रविंदर भट्ठल, रजिंदर बिमल, जिला भाषा खोज अधिकारी नवनीत कौर राय, अंकुश कुमार, कॉलेज के अध्यापक, विद्यार्थी और साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

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